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Ganpati Jyotish | पूजा विधी
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पूजा विधी

पूजा विधी

 

“वीणा वादिनी वर दे वर दे वीणा वर दे” निराला जी कि इन पंक्तियो मे माँ सरस्वती को ज्ञान कि देवीके रूप मे स्वीकारा गया है। और उनकी आराधना को  विद्यार्थी जीवन का परम धर्म माना है। हिन्दू धर्म के अनुसार माँ सरस्वती का जीव युग मे आगमन हि वसंत पंचमी मनाए जाने का एक मात्र धार्मिक कारण है जो कि इसवर्ष 29 जनवरी 2020 को मनाया जाएगा और हिन्दू पंचांग के अनुसार यह माघ महीने मे पड़ता है इस दिन पीले वस्त्र धारण कर माँ सरस्वती कि आराधना करनी चाहिए। इसके साथ हि यह पर्व साल के एक ऐसे विशेष समय पर पड़ता है जब शीत ऋतु अपनी समाप्ति कि ओर होती है और हल्की-हल्की धूप के साथ लोग ग्रीष्म ऋतु का आगमन स्वीकार करते है पेड़ो मे नयी पत्तियांआने लगती है आम के पेड़ो मे बौर लगते है  हर तरफ फूलो कि बाहार होती है और धरती पुष्पो और पेड़ो से सुसज्जित होने लगती है ।

माँ सरस्वती के अनुशरण मात्र से हि विद्यार्थी जीवन को नया आयाम मिल सकता है बशर्ते कि आध्यात्म और शांत मन से उनकी आराधना कि जाए। विद्यार्थीयों का जीवन बिल्कुल कच्ची मिट्टी के समान होता है जिसे ज्ञानरूपी चाक पर चढ़ाकर हि सफलता रूपी घड़े का आकार दिया जा सकता है ।

वसंत पंचमी – 29 जनवरी 2020

दिनबुधवार

पूजा का शुभ मुहूर्त -10:45 बजे से 12:35 बजे तक

 

क्या है पौराणिक मान्यताए

अब जहां तक बात है इस पर्व कि पौराणिक मान्यताओ को लेकर तो ऐसा माना जाता है कि इस सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन ब्रह्मा के हाथो हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मा अपने सृजन से खुश नही थे इस कारण उन्होने अपने कमंडलो से धरती पर एक ऐसी स्त्री प्रकट कि जो कि चतुष्पाणी रूप मे जन्मी जिसके एक हाथ मे वीणा, दूसरा हाथ वर मुद्रा मे था। और अन्य दो हाथो मे पुस्तके और मालाएँ थी।इस चतुष्पाणी स्त्री ने अपने हाथो से जब वीणा का वादन आरंभ किया तो उसकी ध्वनि सम्पूर्ण पृथ्वी सहित दशों दिशाओ मे संखनादके समान गर्जना करने लगी इसकी मधुर ध्वनि सुन पक्षी चहचहाने लगे। तितलिया पुष्पो से रस चुराने लगी। भौरे मँडराने लगे मानो धरती बोल उठी हो। ऐसा अद्भुद दृश्य देख विष्णु ने इस देवी के जन्म को उत्सव कि भांति मनाने को कहा। जिसे हम हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन वसंत पचमी के रूप मे मनाते है।

पूजा अर्चना

आज के दिन पीले वस्त्र धारण कर माँ शारदे कि वंदना करनी चाहिए। पढ़ाई करने वाले छात्रो के लिए इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है क्योकि माँ सरस्वती को ज्ञान का भंडार माना गया है। और विद्यार्थी जीवन मे ज्ञान को हि सर्वमान्य माना गया है।

आज के दिन लोग माँ शारदे कि वंदना कर उनसे ज्ञानवान होने का वर मांगते है।

“ या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥“

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