Enquiry Now
Ganpati Jyotish | पूजा विधी
15708
post-template-default,single,single-post,postid-15708,single-format-standard,theme-bridge,qode-quick-links-1.0,woocommerce-no-js,ajax_fade,page_not_loaded,,paspartu_enabled,columns-3,qode-child-theme-ver-1.0.0,qode-theme-ver-11.1,qode-theme-bridge,wpb-js-composer js-comp-ver-5.1.1,vc_responsive
 

पूजा विधी

पूजा विधी

अश्विन माह की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर रविवार को मनाई जाएगी। इसे रास पूर्णिमा भी कहा जात है। गणपति ज्योतिष संस्थान (आचार्य राज कुमार ) के अनुसार साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन कोजागर व्रत भी किया जाता है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इस रात्रि को चंद्रमा की किरणों से सुधा यानी अमृत की बारीश होती हैं। चंद्रमा सौलह कलाओं से पूर्ण होने के कारण इस रात चंद्रमा की रोशनी को पुष्टिवर्धक माना गया है।
• कैसे मनाएं
शरद पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन व्रत करना चाहिए। अपने आराध्य देव की पूजा करनी चाहिए। फिर शाम को खीर बनाकर रात को शुभ मुहूर्त में सभी देवी देवताओं को और फिर चंद्रमा को उस खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद चंद्रमा अर्ध्य देकर भोजन या फलाहार करना चाहिए। इसके बाद घर की छत पर या किसी खुले स्थान पर साफ जगह खीर रखें और वहीं चंद्रमा की रोशनी में बैठकर भजन-किर्तन करना चाहिए। इसके बाद अगले दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में उस खीर को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए।
• शरद पूर्णिमा मुहूर्त
सुबह 8:05 से 11:50 तक
दोपहर 01:45 से 02:45 तक
शाम 06:05 से रात 10:25 तक
चंद्रमा पूजन और नैवेद्य का समय
शाम 07:35 से रात 08:50 तक
निशिता (मध्यरात्रि) मुहूर्त
रात 11:45 से 12:30 तक
• व्रत और पूजा की विधि
• शरद पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर नहाकर आराध्य देव को सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करके आवाहन, आसान, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करें।
• रात को गाय के दूध से बनी खीर में गाय का घी, चावल और सूखे मेवे तथा चीनी मिलाकर मध्यरात्रि में के समय भगवान को भोग लगाना लगाना चाहिए।रात में पूर्ण चंद्रमा का पूजन करें तथा खीर का नैवेद्य अर्पण करके, रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन उसका भोजन करें तथा सबको उसका प्रसाद दें।पूर्णिमा का व्रत करके कथा सुननी चाहिए। कथा सुनने से पहले एक लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, पत्ते के दोनों में रोली तथा चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढ़ाएं। फिर तिलक करने के बाद गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनें। इसके बाद कलश के जल से रात को चंद्रमा को अर्ध्य दें।चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद भोजन करें और संभव हो तो रात्रि जागरण के साथ भजन और किर्तन करें।
• इसका महत्व
शरद पूर्णिमा से ही कार्तिक स्नान और व्रत प्रारम्भ हो जातें हैं। इस दिन माताएं अपनी संतान की मंगल कामना से देवी-देवताओं का पूजन करती हैं। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत पास आ जाता है। कार्तिक का व्रत भी शरद पूर्णिमा से ही प्रारम्भ होता है। विवाह होने के बाद पूर्णिमा के व्रत का नियम शरद पूर्णिमा से लिया जाता है। शरद पूर्णिमा पर कोजागर व्रत और महालक्ष्मी पूजा की जाती है। इससे घर में सुख और समृद्धि आती है।
रात में चंद्रमा की पूजा करके चांदनी में खीर रखकर अगले दिन खाने से हर तरह की बीमारियां दूर हो जाती हैं।

Please follow and like us:
error0
No Comments

Post A Comment